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Dera Baba Murad

  जै बाबा शेरे शाह जी | जै बाबा मुराद शाह जी | जै बाबा लाडी शाह जी

 

कोई लाखों में से एक ही गुरु का पक्का मुरीद बनता है, जैसे गुरदास मान जी ने बनके दिखाया और निभाया. एक बार की बात है गुरदास जी साईं जी के पास बैठे थे उस समय उनका बूट पॉलिशं वाला गाना बहुत मशहूर हुआ था, साईं जी कहते "क्या बात गुरदास सारा दिन बूट पोलिश वाला गाना ही चलता रहता है टीवी पे" गुरदास जी बोले साईं जी आपकी कृपा है. साईं जी कहते "नहीं गुरु रविदास जी ने तेरे पर बहुत कृपा की है ". साईं जी ने कहा याद है वह लड़का जिसके साथ तू फोटो खिंचवा के आया है, एक बार मुल्लांपुर गांव में गुरदास मन जी का प्रोग्राम हुआ था. प्रोग्राम के बाद बहुत लोग फोटो खिंचवा रहे थे, एक बूट पोलिश करने वाला लड़का जिसके कपडे फटे हुए थे वह भी फोटो खिंचवाना चाहता था, लेकिन उसे सेवादार आगे आने नहीं दे रहे थे. गुरदास जी की नज़र जब उस पर पड़ी तो उन्होंने बोला की इसे आने दो. आगे रस्सियां लगी हुई थी गुरदास जी ने कहा "रस्सियां खोल कर स्टेज पर आजा" लड़का स्टेज पर आया उसने अपनी बूट पोलिश वाली पेटी नीचे रखी तो गुरदास मान जी बोले "ना नीचे मत रख, जिस तरह मैंने अपनी डफली सीने से लगा के राखी है ऐसे ही रखा कर, रोज़ी रोटी है, ना जाने किस भेस में नारायण मिल जाये" उस बचे ने फोटो खिंचवाई और गुरदास जी ने जस्सी को कहा कि फोटोग्राफर को पैसे देदेना जिस से बच्चे को फोटो मिल जाये. वो बच्चा बहुत खुश हुआ, साईं जी कहते जिस बच्चे के साथ तू फोटो खिंचवा कर आया है वो बच्चा गुरु रविदास जी का है और उन्होंने तुझे आशीर्वाद दिया है.

साईं जी की हर बात में एक रमज़ होती थी, एक बार केसरी पगड़ी बाँध कर एक सरदार आया और माथा टेकने लगा, साईं जी ने कहा "ना माथा नहीं टेकना". उसने कहा पर साईं जी मैं तो पूरी शरदा के साथ आया हूँ, साईं जी ने कहा "यह केसरी निशान हमारे दाता गुरु गोबिंद सिंह जी का है जिन्होंने 4 बेटे वारे, पांचवीं मां वारि, छठा बाप वरिया ते सातवां आप वरिया. इस निशान को हमने झुकाना नहीं अगर माथा टेकना हो तो किसी और रंग की पगड़ी बांध कर आ जाना." साईं जी एक ऐसे फ़क़ीर थे जो हर किसी से प्यार करते थे चाहे दर पर आया कोई सवाली हो या कोई जानवर, एक बार साईं जी के शरीर पर एक कीड़ा चढ़ा जा रहा था. एक पास खड़े आदमी ने देखा और कुछ आस पास देखने लगा उसे मारने के लिए . साईं जी कहते तुम क्या चाहते हो मैं इसे मार दूँ, यह भी उसका जीव है जिसकी जान लेने का हक़ हमें नहीं है. साईं जी की तरह लोग भी साईं जी से बहुत प्यार करते थे, एक बार नकोदर का एक परिवार साईं जी को शादी पर आने के लिए निमंत्रित करके गया. शादी वाले दिन उनके घर सांप निकल आया, घर वालों ने सांप को पकड़ के दूर छोड़ दिया. अगले दिन साईं जी के पास गए और बोले साईं जी आप क्यों नहीं आये. साईं जी कहते "आपने तो मुझे मार ही देना था", मैं तो आया था पर आप लोगों ने बहार निकल दिया. उनकी लीला कोई ही समझ सकता है . एक बार एक औरत साईं जी पास चली आ रही थी, साईं जी ने शरदा जी से कहा यह तो वही औरत है जो लड़का मांगके गयी थी पिछले साल. औरत ने साईं जी को नमस्कार किया, साईं जी ने पूछा माता लड़का हो गया था ? औरत बोली बाबा जी लड़का तो हो गया था पर थोड़ा सा पिलपिला है. साईं जी बोले जैसे केले चढ़ाये थे वैसा लड़का हो गया. साईं जी अक्सर एक ही नुक्ते में पूरी बात कर देते थे.

गुरदास मान जी के दो एक्सीडेंट भी हुए पहला 2001 में और दूसरा 2007 में दोनों ही जनवरी में हुए, पहले एक्सीडेंट में माथे की दायीं तरफ लगी और दुसरे एक्सीडेंट में माथे की बायीं तरफ लगी. गुरदास जी कहते शायद मालिक ने कोई तराजू बराबर करनी थी. या कोई भर उतारना था. गुरदास मान जी का पहला एक्सीडेंट 9 जनवरी 2001 को हुआ, मान साहब अपने ड्राइवर के साथ चंडीगढ़ से नकोदर की तरफ चले थे की रूपनगर के पास एक ट्रक के साथ गाडी का एक्सीडेंट हो गया जिसमे उनके ड्राइवर तेजपाल की मौत हो गयी थी. उसदिन पहली बार तेजपाल ने गुरदास जी को बेल्ट लगाने के लिए कहा था, जिसके थोड़ी ही देर बाद एक्सीडेंट हो गया. साईं जी ने गुरदास जी के ड्राइवर को पहले ही कहा था की यह गाडी उस पर भरी है, इसको दो दिन के लिए दरबार छोड़ जाये. फिर गुरदास मान जी प्रोग्राम के लिए कनाडा चले गए और जाने से पहले अपने ड्राइवर को कह गए की गाडी दरबार छोड़ आना. पर तेजपाल गाड़ी लेके अपने दोस्तों के साथ दिल्ली चला गया और कुछ दिन बाद अपने दोस्तों के साथ अमृतसर के लिए निकल पड़ा, गाडी में पहले उन्होंने शराब पी फिर सफर शुरू किया. रास्ते में जब जालंधर पहुंचे तब याद आया की साईं जी ने गाडी छोड़ जाने को कहा था. जब वह नकोदर पंहुचा तो गाडी दरबार के बहार खड़ी की, अंदर गया और साईं जी को कहा मैं गाड़ी छोड़ने आया हूँ. साईं जी ने पुछा "गाडी में शराब भी पड़ी है ?" अब साईं जी को कौन झूठ बोले, तेजपाल ने कहा हांजी पड़ी है. साईं जी ने कहा "गाडी छोड़ने आया है की अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मानाने आया है" मतलब गाडी छोड़नी थी तो पहले ही छोड़ जाता. फ़क़ीर अपने बोलों के पक्के होते हैं . वह उस समय मौके को संभालना चाहते थे पर नहीं संभला.