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Dera Baba Murad

  जै बाबा शेरे शाह जी | जै बाबा मुराद शाह जी | जै बाबा लाडी शाह जी

 

फिर 09-01-2001 को जब एक्सीडेंट हुआ तो गाड़ी ने 3 पलटीयां खाई जिसमे ड्राइवर तेजपाल की मौत हो गयी थी. गुरदास मान जी को कुछ लोगों ने निकाला और हस्पताल लेके गए. गुरदास जी बताते हैं की उन्हें लगा था की जैसे दुनिया से जाने का समय आ गया पर साईं जी ने बचा लीया, कुछ दिन बाद चलने फिरने भी लग गए. फिर 26 जनवरी को रुड़का कलां गाकर आये. रुड़का जंडियाला शहर के पास है जहाँ बाबा चिंता भगत जी और बाबा अमी चंद जी की दरगाह है. बाबा अमी चंद जी भी साईं जी की तरह बहुत पहुंचे हुए फ़क़ीर थे जो सिख्या के लिए बापू ब्रहम जोगी जी के पास आते थे. रुड़का कलां हमेशा 26 जनवरी को मेला होता है जहाँ गुरदास मान जी 1988 से लगातार गा रहे हैं. उस समय गुरदास जी पूरी तरह ठीक नहीं हुए थे, लेकिन फिर भी कुछ समय के लिए हाज़री लगाकर आये थे.

दूसरा एक्सीडेंट 20 जनवरी 2007 करनाल शहर के पास हुआ जिस में गाडी उनका ड्राइवर गणेश चला रहा था, एक्सीडेंट करनाल में हुआ और नकोदर साईं जी की मालिश हो रही थी, काला कहता साईं जी आपके शरीर पर रातो रात नील कैसे पड़ गए. साईं जी ने कहा अभी बताते है तू मालिश कर. फिर कहा अब टीवी लगा, काले ने टीवी लगाया और खबर आ रही थी " गुरदास मान का एक्सीडेंट हुआ " . गुरु हमेशा अपने मुरीद का कष्ट अपने पर ले लेता है. एक्सीडेंट के दो दिन बाद ही गुरदास जी डेरे आये और साईं जी के पास बैठे, लेकिन उनसे बैठा नहीं जा रहा था. गुरदास जी बैठे तो साईं जी कहते गुरदास पानी का गिलास लेके आना. फिर बैठते तो साईं जी फिर कुछ ना कुछ लेके आने को कह देते. देखने वाले को अजीब लगता लेकिन गुरदास जी बताते हैं की साईं जी ने उन्हें उठा उठा के उनके सारे बल सीधे कर दिए. फिर गुरदास जी जब जाने लगे तो साईं जी ने कहा कल मेला है रुड़का कलां चाहे थोड़ा गा आना लेकिन हाज़री जरूर लगाके आना. गुरदास जी बताते हैं की वह 10 मिनट के लिए गाने गए थे पर उन्हें ऐसा सुरूर आया अपने गुरु की कृपा का की 1.5 घंटे पट्टी बांध कर गाते रहे.

जब साईं जी काफी वृद्ध हो गये थे तब मेले में एक या दो बार ही दर्शन देने आते थे. एक बार साईं जी काफी झुक कर सीढ़ियां चढ़ रहे थे की एक सेवादार ने हाथ जोड़कर साईं जी से कहा "साईं जी थोड़ा सीधा होकर चलो" साईं जी कहते "बेटा हमने जो भी पाया है झुक कर ही पाया है". उन्होंने एक ही बात में सब कह दीया. साईं जी हर मोड़ पर कोई ना कोई शिक्षा दे दते थे. इस फ़क़ीर की आज़माइश के लिए बहुत लोग आये और सब नसमस्तक होकर गए. एक बार एक आदमी ने साईं जी को सवाल किया कहता बाबा जी प्यार का क्या मतलब है.साईं जी बोले "जहाँ मतलब आ जाये वहां प्यार नहीं होता".

गुरदास मान जी साईं जी के सबसे प्यारे बने, साईं जी ने 2006 मेले में अपनी पगड़ी उतारकर गुरदास मान जी के सर पे रख दी थी , पगड़ी अपने मुरीद को देने करने का मतलब होता है की, गुरु अपना सब कुछ अपने मुरीद को अर्पित कर देता है और मुरीद को सदा सदा के लिए अपना बना लेता है. साईं जी ने शरीर छोड़ने से पहले ही अपनी जगह ज़मीन के अंदर बनवा रखी थी. लोग अपने घर और ऊँचे करते हैं, लेकिन अपनी जगह जमीन के अंदर एक सतगुरु ही बना सकता है. उनको पता था की जाना है साईं जी कहते होते थे "जब भी देखता हूँ रोज़ा यही बात याद आती है, चलो चल याद आती है, चलो चल याद अति है". दुनियावी मोह माया को छोड़कर अपने यार अपने गुरु को मिलने का इंतज़ार. फिर 1 मई 2008 को वीरवार वाले दिन साईं जी ने शरीर छोड़ दिया. जिनकी मज़ार भी डेरा बाबा मुराद शाह में बनी हुई है. "मेरा लिख ले गुलामां विच नाम" साईं जी की पसंदीदा कवाली थी. साईं जी हमेशा अपने आप को गुलाम लिखते रहे थे.

 

साईं जी की बरसी हर साल 1 - 2 मई को बड़ी धूम धाम के साथ मनाई जाती है, जहाँ लाखों की तादात में सांगत पहुँचती है.